नगरकोट धाम का रहस्य: जहाँ गिरा था माँ सती का दाहिना वक्ष | Chaitra Navratri 2026 Kangra Devi

"सावधान! अगर इस नवरात्रि 'नगरकोट धाम' नहीं गए, तो अधूरी रह जाएगी आपकी भक्ति! जानें तीन धर्मों के मिलन का वो गुप्त रहस्य।"

Bajreshwari Devi Temple Kangra Nagarkot Dham Shaktipeeth Photo

नगरकोट धाम का रहस्य: जहाँ गिरा था माँ सती का दाहिना वक्ष | Chaitra Navratri 2026 Kangra Devi

Lifestyle Desk: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में स्थित यह चमत्कारी शक्तिपीठ सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था का वो सैलाब है जहाँ हिंदू, मुस्लिम और सिख... तीनों धर्मों के सिर झुकते हैं। इस चैत्र नवरात्रि अगर आप भी कुछ अद्भुत अनुभव करना चाहते हैं, तो 'नगरकोट वाली माता' के दरबार की ये बातें आपको हैरान कर देंगी!

1. जहाँ गिरा था माँ का 'अंग' 

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यहाँ माता सती का दाहिना वक्ष गिरा था। यहाँ माँ बज्रेश्वरी एक 'पिंडी' के रूप में साक्षात विराजमान हैं। कहते हैं कि यहाँ मत्था टेकते ही बड़े से बड़ा कष्ट भी कपूर की तरह उड़ जाता है।

2. तीन गुंबद: एकता की अनूठी मिसाल

इस मंदिर की सबसे खास बात इसके तीन गुंबद हैं। पहला गुंबद 'सिख गुरुद्वारे' जैसा है, दूसरा 'इस्लामी मस्जिद' की याद दिलाता है और तीसरा 'पारंपरिक हिंदू मंदिर' की शैली में है। यह दुनिया को 'सर्वधर्म समभाव' का ऐसा संदेश देता है जो आपको कहीं और नहीं मिलेगा।

3. ध्यानू भक्त की वो 'गर्दन' और गोबर का चमत्कार!

मंदिर के प्रांगण में महान भक्त 'ध्यानू' की प्रतिमा है, जिन्होंने माँ के चरणों में अपनी गर्दन काटकर अर्पित कर दी थी। यहाँ एक और गजब की मान्यता है—जब भीषण सूखा पड़ता है, तो ध्यानू भक्त की मूर्ति पर गोबर का लेप लगाया जाता है और चमत्कार देखिए... देखते ही देखते आसमान से बारिश होने लगती है!

4. पीठ पर सिंदूर का छापा और पीतल का कड़ा

यहाँ की परंपराएं भी बड़ी निराली हैं। श्रद्धालु अपनी यात्रा शुरू करने से पहले घर की दीवार पर हाथ का छापा लगाते हैं, और दर्शन के बाद मंदिर के पुजारी भक्तों की 'पीठ' पर हाथ का सिंदूर लगाते हैं। इसके बाद ही यात्रा पूरी मानी जाती है। घर लौटते समय लोग 'पीतल का कड़ा' पहनना नहीं भूलते, जो सुरक्षा कवच माना जाता है।

5. घी का वो अद्भुत 'घृत मंडल'

मकर संक्रांति के दौरान यहाँ माँ की पिंडी को कई किलो देसी घी से बने मक्खन से सजाया जाता है, जिसे 'घृत मंडल' कहते हैं। यह नज़ारा इतना भव्य होता है कि इसे देखने के लिए देश-विदेश से लोग खिंचे चले आते हैं।

कैसे पहुँचें?

  • हवाई मार्ग: कांगड़ा (गग्गल) एयरपोर्ट यहाँ से मात्र 9 किमी दूर है।

  • रेल मार्ग: कांगड़ा रेलवे स्टेशन से मंदिर सिर्फ 3 किमी की दूरी पर है।

  • सड़क मार्ग: पठानकोट और चंडीगढ़ से शानदार सड़क मार्ग के जरिए आप आसानी से यहाँ पहुँच सकते हैं।

तो इंतज़ार किस बात का? इस चैत्र नवरात्रि माँ नगरकोट वाली आपको बुला रही हैं!